Thursday, 11 December 2014

एक शाम....

एक हाथ में बैग लिए और एक हाथ में चाबी से उसने घर का ताला खोला। आज ऑफिस में काम ज्यादा होने के कारण वो थोडा थक गयी थी। उसने किचन में जाके चाय बनायी और हाथ में कप लिए खुली खिडकी पे आ खडी हुई। दिसंबर की ठंडी शाम थी, हलकी ठंडी हवा ने जब उसे छुआ तो लगा कि जैसे एक याद ताजा हो गई हो, हाँ .. ठीक ऐसी ही थी वो शाम, उस दिन कॉलेज खत्म होने के बाद उसने उसे कॉफी ऑफर की थी। उसने भी मना नहीं किया था, करती भी क्यों.. वही तो उसका सबसे अच्छा दोस्त था ,जिससे वो हर बात शेयर करती थी .. कितनी कॉफी उन दोनों ने साथ पी थी। पर वो शाम ही आज क्यों याद रह गयी, हाथ में कॉफी का कप थामे.. उसके किसी नादान सवाल पर उसने जीवन भ साथ रहने की बात कही थी। कभी मुश्किल से गुस्सा होने वाली वो जिंदगी में कुछ करने का.. पढाई का हवाला देकर तमतमा कर वहाँ से चली गई थी। उस दिन के बाद उकने बीच की बातें बस हाय-हैलो तक सीमित होकर बंद हो गई थी।
आज वो उसी मुकाम पे थी जहाँ वो चहाती थी, पर वो नहीं था जिसने शायद उसके सफल होने की दुआ दिल से की होगी... कुछ था तो उसके ठंडे हाथों का एहसास जो शायद आज भी उसकी हथेली पर ताजा था। चाय पीने के लिये होंठो पे कप लगाया तो पता चला चाय ठंडी हो चुकी है.. एक गर्म साँस के साथ उसने खिडकी बंद की और एक बार फिर चॉय गर्म करने चली गयी।

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